असम्भव की गहरी खाई में गिरी हुई ****
एक 'कील' हूँ मैं *** ?
साधारण ***
जंग लगी ***
जंग लगी ***
खुद से ही टूटी हुई **
थकी ???
कमजोर !!!
तुम्हारा तनिक -सा सपर्श ,,,
मुझे जिन्दगी दे सकता हैं प्रिये !
मुझे उठाकर अपने कॉलर पर सजा लो ****
मैं फूल बनकर खिल जाउंगी !
मुझे उठाकर अपने पहलु में सुला लो ****
मैं प्रेमिका बनकर लिपट जाउंगी !
मुझे उठाकर अपने सीने में छिपा लो ****
मैं याद बनकर छिप जाउंगी !
मुझे उठाकर अपने प्याले में ढाल लो ****
मैं नशा बनकर छा जाउंगी !
मुझे उठाकर अपनी राह का हमसफ़र बना लो ****
मुझे उठाकर अपनी राह का हमसफ़र बना लो ****
मैं राह के रोड़े हटा कलियाँ बिखरा दूंगी!
मुझे उठाकर सर का ताज बना लो ****
मैं दुनियां को तुम्हारे क़दमों में झुका दूंगी !
मैं तुम्हे सपनों के हिंडोले में बैठकर ,
तीसरी दुनियां की सैर करवाउंगी !
मैं तुम्हारे क़दमों में आँचल बिछा कर,
तुम्हें कांटो से बचाउंगी !
मैं तुम्हें मन -मंदिर का देवता बनाकर,
दिनरात तुम्हारी पूजा करुँगी !
मैं तुम्हें अपना सर्वस्त्र देकर,
अमर -लता की तरह लिपट जाउंगी !
मैं तुम्हारी ख्वाहिश में ही अपना मंका ढूंढ कर ,
तुम्हारे साथ ही बह जाउंगी !
नजर नहीं आती मुझे कोई मंजिल ?
डोल रही हैं मेरी किश्ती भंवर में,
अगर तेरे प्यार का सहारा मिल जाए तो,
इस 'जंग' लगी 'कील' का जीवन संवर जाए ...
"तुम्हें अपना बनाना मेरे प्यार की इन्तेहाँ होगी ?
तुमसे बिछड़ना मेरे जीवन की नाकामयाबी ?? "




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बहुत ही अच्छी प्रस्तुति ।
ReplyDeleteकल 15/02/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है !
क्या वह प्रेम नहीं था ?
धन्यवाद!
बहुत ही अच्छी प्रस्तुति। धन्यवाद|
ReplyDeleteसुन्दर चित्रों के साथ ही सुन्दर प्रस्तुति ..
ReplyDeleteचित्र और भावो का खुबसूरत समायोजन......
ReplyDeleteतुम्हें अपना बनाना मेरे प्यार की इन्तेहाँ होगी ?
ReplyDeleteतुमसे बिछड़ना मेरे जीवन की नाकामयाबी ?? "
वाह क्या बात है .....प्रेम की बेहतर अभिव्यक्ति ...!
बहुत सुन्दर प्रस्तुति...
ReplyDeleteप्रेम और समर्पण से सराबोर..
सादर.
बहुत उम्दा ....
ReplyDeleteuff kavi man kya se kya soch leta hai....:)
ReplyDeletebahut khubsurat.. bahut pyari rachna...!!
ek keel se khud ko compare kar liya...
मैं तेरे इश्क की इंतिहा चाहता हूँ
ReplyDeleteमेरी सादगी देख मैं क्या चाहता हूँ :)
बहुत सुन्दर प्रस्तुति...
ReplyDeleteबहुत सुंदर प्रस्तुति...
ReplyDeleteबहुत सार्थक प्रस्तुति!
ReplyDeleteआपकी पोस्ट चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
ReplyDeleteकृपया पधारें
http://charchamanch.blogspot.com
चर्चा मंच-791:चर्चाकार-दिलबाग विर्क
भावपूर्ण चित्र !
ReplyDeleteसमर्पण का भाव लिए हुये अच्छी प्रस्तुति
ReplyDeleteआपकी यह पोस्ट पढ़कर एक पुराना हिन्दी फिल्मी गीत याद आया
ReplyDelete"मुझे तेरी मोहोब्बत का सहारा मिल गया होता अगर तूफान नहीं आता किनारा मिल गया होता" बहुत ही सुर भाव संयोजन किया है आपने शुभकामनायें ....
खूबसूरत पोस्ट ...धन्यवाद जी
ReplyDeleteबहुत सुन्दर ...
ReplyDelete"तुम्हें अपना बनाना मेरे प्यार की इन्तेहाँ होगी ?
ReplyDeleteतुमसे बिछड़ना मेरे जीवन की नाकामयाबी ?? "
कील की भी क्या सुन्दर 'डील' है.
सब अंदर से 'फील'की बात है.
प्यार में 'शील' और समपर्ण न हो तो
प्यार कैसा.
मेरी पोस्ट 'हनुमान लीला-भाग ३'
पर आप क्यूँ नहीं आईं दर्शी जी.
महीने से आपके दरस को तरस गयी.
ऐसे न तरसाया कीजियेगा,प्लीज.